Tuesday, January 1, 2013

नव वर्ष

दिल से निकली आवाज
जब कागज पर गूंजती है
एक कविता अंकुरित होती  है

रूह से निकली आह
जब जुबान से चीखती  है
तो एक क्रांति स्फुठित होती है |

आँखों  में संजोया मनोरम
जब कैनवास पर सजता है
तो एक चित्रकला उकर आती है |

ईट- पत्थर से बनी ईमारत मे
जब एक मूर्ति स्थापित होती है
तो वह पवित्र मंदिर बन जाता है |

पुष्प से पराग चुरा
जब तितली नाचती है
तो एक बगिया खिल जाती है |

पुराने वर्ष को अलविदा कहकर
जब आती है भोर की नयी किरण
तो आगमन होता है एक मंगलमय नव वर्ष का |

 

8 comments:

  1. Tumhari Hindi kaafi shashakt hai yaar. M really glad that someone is promoting the language through such a powerful medium :)

    ReplyDelete
  2. Thank-You Ritesh. I'm a newbie here and will some more posts. Keep checking. :)

    ReplyDelete
  3. Shaandaar kavita.....www.jeevanmag.tk

    ReplyDelete
  4. Replies
    1. Utsah-wardhan ke liye shukriya Deepak :)

      Delete

Don't leave before leaving your words here. I will count on your imprints in my blogspace. :)