Sunday, July 28, 2013

मरीचिका





रूमानी हवा के झोके

बिखेरते थे उनकी भीनी खुशबू

आवारा बादलो की टोली

बनाते थे उनकी तस्वीरे

रिमझिम बारिश की बूंदे

बरसाती थी उनकी भीगी यादें

चले गए वो उस पार

जहाँ  हवा रुखी है

बादल बंदिश में है

बारिश बरसना भूल गई है

क्यूंकि उस पार मरीचिका है |



Hioy'oy Hoi Polloi
JJJ

1 comment:

  1. Bahut sundar kavita hai! Baarish barasna bhool gai. Very impressive!

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