Sunday, February 19, 2017

वादा


जो मिलने का वादा करके 
न मिलने का बहाना बनाए 
समझ लेना दोस्त
वो वादों के मायने नहीं समझते 
और जो वादों को ना समझे 
उन्हें अपनी यादों में पनाह ना देना |

Gracias!
 

उस पार

उठा यादों का बस्ता  
चल पड़ा मैं वही रस्ता
जहाँ चाय की चुस्की 
में छुपी थी मेरी ख़ुशी 
ख़ुशी रोज़ उससे मिलने की
जी भर के बतियाने की 
हवा में ख्वाबों को बुनने की            


रस्ता नहीं बदला पर शायद वक्त बदल गया 
वक़्त के साथ हम बदल गए 
और हमारे साथ ख़ुशी के मायने भी 
दो आने के कंचों से ऊँचे मंचो तक पहुँचने की होड़ 
और तभी पीछे छूट गयी हमारी वो प्यारी सी हँसी 

फेसबुक व्हाट्सएप्प पे ढूंढने लगे बिछड़े यारों को 
पर अब सब कुछ सिर्फ लाइक्स और कमैंट्स तक ही सिमट गया
खोया यार मिलके भी मिल न पाया 
और मैं चाह कर भी उसे याद दिला न पाया

उसकी जिंदादिली और बेकार चुटकुले ही तो थे 
जो मुझे खींचकर वापिस उस तक लाये थे 
पर जैसे वो समय से रेस लगाने में लगा हुआ है
अपनी ख़ुशी छोड़ दूसरों को खुश करने में लगा हुआ है  

देख कर बदला यार 
न जाना चाहा मैंने उस पार
उठा अपना बस्ता 
टटोला यादों का गुलदस्ता 
देख जहाँ अपना पुराना यार 
जाना चाहा मैंने फिर उस पार


Gracias!
 
Silly smiles Take you Miles.