मरीचिका
रूमानी हवा के झोके
बिखेरते थे उनकी भीनी खुशबू
आवारा बादलो की टोली
बनाते थे उनकी तस्वीरे
रिमझिम बारिश की बूंदे
बरसाती थी उनकी भीगी यादें
चले गए वो उस पार
जहाँ हवा रुखी है
बादल बंदिश में है
बारिश बरसना भूल गई है
क्यूंकि उस पार मरीचिका है |
Hioy'oy Hoi Polloi
JJJ

Bahut sundar kavita hai! Baarish barasna bhool gai. Very impressive!
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